Vodafone Idea के लिए AGR (Adjusted Gross Revenue) केस एक निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। आज, 27 अक्टूबर 2025 को, सुप्रीम कोर्ट कंपनी की ₹9,450 करोड़ की अतिरिक्त AGR देनदारी पर सुनवाई करने जा रहा है। इसका असर कंपनी की वित्तीय स्थिति, बाजार की धारणा और सरकार की भूमिका पर पड़ेगा।
वोडाफोन आइडिया का AGR विवाद क्या है
AGR दरअसल टेलीकॉम कंपनियों की वह आय होती है, जिसके आधार पर लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम चार्जेज़ सरकार को दिए जाते हैं। Department of Telecommunications (DoT) ने Vodafone Idea से ₹9,450 करोड़ की अतिरिक्त AGR मांग की है, जिसे कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसमें से ₹2,774 करोड़ का बकाया FY18-19 से जुड़ा है जो वोडाफोन और आइडिया के मर्जर के बाद सामने आया, जबकि ₹5,675 करोड़ प्री-मर्जर वोडाफोन ग्रुप से है। कंपनी ने आरोप लगाया कि इन गणनाओं में डुप्लिकेट एंट्रियाँ हैं और उसने 2017 से पहले तक का पुनर्मिलान मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट में अब तक की कार्यवाही
19 सितंबर को सरकार ने कोर्ट में कहा कि उसे कंपनी की याचिका पर कोई खास आपत्ति नहीं है, क्योंकि सरकार खुद कंपनी में लगभग 50% इक्विटी होल्डर है। इसके बाद 26 सितंबर, 6 अक्टूबर और 13 अक्टूबर को लगातार सरकार की ओर से समय मांगा गया जिससे सुनवाई टलती रही। आज, दिवाली के बाद पहली बार यह मामला फिर से सूचीबद्ध हुआ है और चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में बेंच सुनवाई करेगी.
केंद्र सरकार और बैकडोर बातचीत
केंद्र ने संकेत दिए हैं कि एक समाधान पर विचार चल रहा है क्योंकि सरकारी हिस्सेदारी कंपनी में ज्यादा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार एक वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) की संभावना तलाश रही है, जिसमें ब्याज और पेनल्टी माफी जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा प्रस्ताव तैयार होता है तो Vodafone Idea को राहत मिलने की संभावना है और निवेश जुटाने का रास्ता खुल सकता है।
VI शेयर बाज़ार में हलचल
Vodafone Idea के शेयर हाल के दिनों में सुर्खियों में रहे हैं। शुक्रवार, 24 अक्टूबर को शेयर 1.2% बढ़कर ₹9.63 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में इसमें 17% की बढ़त देखी गई और शेयर अपने FPO प्राइस ₹11 के क़रीब पहुँच गया। पिछले तीन महीनों में कंपनी ने 27% से अधिक रिटर्न दिया है और केवल अक्टूबर माह में शेयर ने 10% से ज्यादा की तेजी दिखाई है। बाजार पूंजीकरण करीब ₹1.04 लाख करोड़ पर पहुँच गया है, जबकि 52 हफ्तों का हाई ₹10.48 है.
क्या कहा Vodafone Idea ने?
Vodafone Idea का कहना है कि DoT की यह राशि सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के दायरे से बाहर है। कंपनी ने AGR में गणना की गलतियों को रेखांकित किया है और ‘Deduction Verification Guidelines’ (2020) के अनुसार सारी बकाया राशि का पुनर्मिलान चाहती है। इससे पहले 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की पुनः गणना व रेक्टिफिकेशन संबंधी याचिकाओं को खारिज कर दिया था, मगर केंद्र सरकार अब समाधान की दिशा में इच्छुक नजर आ रही है.