Ola Electric ने हाल ही में घोषणा की है कि उसकी बोर्ड बैठक में 1500 करोड़ रुपये तक की फंड जुटाने को मंजूरी दे दी गई है। यह पूंजी कंपनी विभिन्न माध्यमों से जैसे राइट्स इश्यू, क्वालिफाइड इंस्टिट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), प्राइवेट प्लेसमेंट या अन्य कानूनी रूप से मान्य तरीके से जुटाएगी।
यह जानकारी एक फाइलिंग के जरिए सार्वजनिक की गई। बोर्ड के इस निर्णय का असर सोमवार, 27 अक्टूबर को शेयर बाजार खुलने के बाद कंपनी के शेयरों पर देखने को मिल सकता है। ऐसा पहली बार नहीं है, इससे पहले भी ओला इलेक्ट्रिक ने मई 2025 में 1,700 करोड़ रुपये डिबेंचर और अन्य डेब्ट सिक्योरिटी के जरिये जुटाने की मंजूरी दी थी.
फंड जुटाने के उद्देश्य
कंपनी ने नियामकीय घोषणा में यह स्पष्ट नहीं किया कि फंड रेजिंग का मुख्य उद्देश्य क्या है। आम तौर पर कंपनियां इस तरह की पूंजी का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने, नए मॉडल और प्रोडक्ट लॉन्च, बैटरी निर्माण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा लोन रीपेमेंट जैसे कार्यों के लिए करती हैं। ओला इलेक्ट्रिक इन दिनों अपने S1 सीरीज ई-स्कूटर के साथ-साथ गिगाफैक्ट्री के निर्माण और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम ‘ओला शक्ति’ जैसे नए प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है, जिससे इसका ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार तेज हो रहा है.
ओला इलेक्ट्रिक शेयरों का हाल
Ola Electric के शेयरों में हाल में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुक्रवार, 24 अक्टूबर को कंपनी का शेयर 1.62% गिरकर 52.85 रुपये पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में शेयर करीब 6.4% टूटा है जबकि सालभर में 33.9% तक गिरावट आई है। स्टॉक का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 102.5 रुपये और निम्न स्तर 39.58 रुपये रहा। कंपनी का मार्केट कैप करीब 23,311 करोड़ रुपये है.
Ola Electric के बारे में
बेंगलुरु स्थित Ola Electric फिलहाल भारत के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता में से एक है। अगस्त 2024 में आईपीओ के जरिये कंपनी ने 5,500 करोड़ रुपये जुटाए थे और बाद में शेयरों का विस्तार हुआ। कंपनी ने अपनी गिगाफैक्ट्री के माध्यम से बैटरी निर्माण क्षमता को भी बढ़ाया है।
हाल ही में “ओला शक्ति” नाम से रेसिडेंशियल बैटरी एनर्जी सिस्टम (BESS) लॉन्च किया गया है, जिससे ओला इलेक्ट्रिक का फोकस ऊर्जा स्टोरेज सेगमेंट पर भी है। उधर, कंपनी के मार्केट शेयर में थोड़ा गिरावट देखने को मिली है — अब ओला का ईवी मार्केट शेयर करीब 13.2% है, जबकि पहले यह ज्यादा था। इसके अलावा कंपनी की रेवेन्यू और नेट लॉस में भी हाल के महीनों में बदलाव देखा गया है, जिसमें रेवेन्यू में 50% की गिरावट और घाटे में 23% की बढ़त दर्ज हुई है.
(यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है इसमें दिए गए आंकड़े या तथ्यों का मकसद किसी निवेश की सलाह देना नहीं है निवेश से पहले हमेशा अपनी जांच करें या वित्तीय सलाहकार से सलाह लें)