Oil PSU : सितंबर 2025 में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 4,128% बढ़कर ₹7,610.45 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह मात्र ₹180 करोड़ था। यह बढ़त भारतीय ऑयल सेक्टर में एक रिकॉर्ड मानी जा रही है।
इंडियन ऑयल का रेवेन्यू
कंपनी का रेवेन्यू सितंबर तिमाही में 4% बढ़कर ₹2,02,992.34 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में सीमित सुधार है। पिछले साल इसी तिमाही में रेवेन्यू ₹1,95,148.94 करोड़ था। टॉपलाइन बढ़त कम रही लेकिन बॉटमलाइन, यानी शुद्ध मुनाफे में बढ़ोतरी से कंपनी के ऑपरेशनल सुधार की पुष्टि होती है।
ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में मजबूती
FY26 की पहली छमाही में IOC का औसत GRM $6.32 प्रति बैरल रहा, जो पिछले साल $4.08 था। कंपनी के कोर GRM में भी सुधार दिखा और यह $7.89 प्रति बैरल तक गया। Q1 FY26 में यही मार्जिन 4.01% था, जो Q2 FY26 में बढ़कर 5.28% पर पहुंच गया। बढ़े हुए GRM का सीधा असर कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ा है।
LPG सब्सिडी से राहत
सरकार ने बफर LPG घाटा को रिकवर करने के लिए IOC और अन्य तेल कंपनियों को ₹14,486 करोड़ की सब्सिडी मंजूर की है। यह भुगतान नवंबर 2025 से शुरु होकर 12 माह में मासिक रूप से किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक बफर अकाउंट में ₹25,768 करोड़ का घाटा था। इस राशि को मिलने से वर्किंग कैपिटल में आराम मिलेगा और कंपनी की बैलेंस शीट में स्थिरता आएगी।
IOC शेयर प्राइस
Q2 FY26 के नतीजे घोषित होने से पहले ही IOC के शेयर प्राइस में तेजी दिखी। सोमवार को कंपनी का शेयर 3% उछलकर ₹155.23 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में शेयर में 4% की वृद्धि देखी गई है।
आईओसी के आने वाले ट्रेंड
बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन, नियंत्रित खर्च और LPG सब्सिडी फ्लो के कारण कंपनी की ऑपरेशनल स्थिति तिमाही-दर-तिमाही मजबूत हो रही है। फ्यूल डिमांड, क्रूड प्राइस और सब्सिडी के फ्लो से आने वाले क्वार्टर्स के रुझान तय होंगे। दूसरी ओर, बॉटमलाइन सुधार और GRM की मजबूती से अन्य ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के नतीजों पर भी असर पड़ सकता है।
(यह लेख कोई निवेश सलाह नहीं है इसलिए निवेश करने से पहले वित्तीय सलाहकार से सलाह करें)