सितंबर तिमाही में कुछ बड़ी और विदेशी कंपनियों यानी एफआईआई (FII) और प्रमोटरों ने कई छोटी कंपनियों के शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटा दी। आम तौर पर जब ऐसा होता है, तो लोग सोचते हैं कि अब इन शेयरों में गिरावट आएगी। लेकिन इस बार मामला उल्टा निकला। हिस्सेदारी घटने के बाद भी इन शेयरों ने जोरदार तेजी दिखाई। कुछ कंपनियों के शेयरों ने तो सात महीने में 25 से लेकर 87 फीसदी तक का रिटर्न दिया है।
मोस्चिप टेक्नोलॉजीज (Moschip Technologies)
मोस्चिप टेक्नोलॉजीज (Moschip Technologies) नाम की कंपनी का शेयर इस साल जबरदस्त भागा। यह 146 रुपये से बढ़कर 273 रुपये तक पहुंच गया। यानी करीब 87 फीसदी का उछाल। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस बीच विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी 1.01% से घटाकर 0.81% कर दी, और कंपनी के प्रमोटरों ने भी 44.28 फीसदी से घटाकर 41.65 फीसदी तक कर दी। इसके बावजूद शेयर ने शानदार रिटर्न दिया।
वीआईपी इंडस्ट्रीज (VIP Industries)
वीआईपी इंडस्ट्रीज (VIP Industries) का नाम तो लगभग हर कोई जानता है। इस कंपनी के शेयर में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। यह 280 रुपये से बढ़कर 439 रुपये तक पहुंच गया, यानी करीब 57 फीसदी का रिटर्न। इसके बावजूद, एफआईआई की हिस्सेदारी 7.27 फीसदी से घटकर 6.95 फीसदी तक आ गई और प्रमोटरों की हिस्सेदारी 51.73 फीसदी से घटकर 49.73 फीसदी रह गई।
पारस डिफेंस (Paras Defence and Space Technologies)
डिफेंस सेक्टर की कंपनी पारस डिफेंस (Paras Defence) ने भी अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। इस कंपनी का शेयर 479 रुपये से बढ़कर 716 रुपये तक पहुंच गया, यानी करीब 49 फीसदी की बढ़त। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है। उन्होंने 6.85 फीसदी से घटाकर 5.70 फीसदी तक कर दी, और प्रमोटर हिस्सेदारी भी थोड़ी घटकर 53.20 फीसदी रह गई। इसके बावजूद कंपनी के शेयर ऊपर गए, जो दिखाता है कि लोगों को इसके बिजनेस पर भरोसा है।
डीसीबी बैंक (DCB Bank)
डीसीबी बैंक (DCB Bank) का भी साल अच्छा रहा। इसके शेयर की कीमत 112 रुपये से बढ़कर 159 रुपये तक पहुंची, यानी करीब 42 फीसदी की तेजी। इस दौरान भी एफआईआई की हिस्सेदारी 11.69 फीसदी से घटकर 10.49 फीसदी रह गई, और प्रमोटरों की हिस्सेदारी में भी बस थोड़ी गिरावट आई। इसके बावजूद बैंक ने बेहतर प्रदर्शन किया और निवेशकों को अच्छा फायदा दिया।
मनोरमा इंडस्ट्रीज (Manorama Industries)
मनोरमा इंडस्ट्रीज (Manorama Industries) के शेयर की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। यह 1,062 रुपये से बढ़कर 1,496 रुपये हो गया, यानी 41 फीसदी की बढ़त। कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 3.40 फीसदी से घटकर 2.52 फीसदी रह गई, और प्रमोटरों की हिस्सेदारी 54.41 फीसदी से थोड़ी घटकर 54.32 फीसदी रह गई। मगर इसके बावजूद कंपनी ने बाजार में भरोसा कायम रखा और लगातार रिटर्न दिया।
निवेशकों के लिए सलाह
लोग अक्सर यह मानते हैं कि अगर बड़ी संस्थाएं जैसे एफआईआई (FII) या प्रमोटर अपने शेयर बेच रहे हैं, तो शायद कंपनी में कोई दिक्कत है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इन छोटी कंपनियों ने दिखा दिया कि उनकी असली ताकत उनके बिजनेस में है, न कि सिर्फ बड़े निवेशकों के भरोसे पर। इससे यह साफ हुआ कि मार्केट में हमेशा सोच-समझकर और लंबी नजर से निवेश करना जरूरी है।
(यह जानकारी केवल शिक्षा और सामान्य समझ के लिए है। यह किसी तरह की निवेश राय नहीं है। शेयर बाजार में पैसा लगाते समय हमेशा अपनी रिसर्च करें या किसी वित्तीय सलाहकार से राय लें।)